
इस बार उत्तर नहीं देती हूँ। बाद में जोड़ दूंगी-
उड़न तश्तरी सी उड़ती हूँ,
बिन चाभी बिन इंजन।
सबका मन बहलाती फिरती,
स्टेशन से स्टेशन।
बूझो तो जानूं!!!
(रचनाकार- रानी पात्रिक)
उत्तर- फ्रिस्बी,Frisbee (यह उत्तर बाद में जोड़ा गया है)
विदेश में रहते हुए, बच्चों में हिन्दी के प्रति प्यार जगाने वाले सभी अभिभावकों को समर्पित