Showing posts with label पहेलियाँ. Show all posts
Showing posts with label पहेलियाँ. Show all posts

Monday, May 25, 2009

पहेली


इस बार उत्तर नहीं देती हूँ। बाद में जोड़ दूंगी-

उड़न तश्तरी सी उड़ती हूँ,
बिन चाभी बिन इंजन।
सबका मन बहलाती फिरती,
स्टेशन से स्टेशन।

बूझो तो जानूं!!!

(रचनाकार- रानी पात्रिक)


उत्तर- फ्रिस्बी,Frisbee (यह उत्तर बाद में जोड़ा गया है)

Saturday, May 23, 2009

पहेलियाँ




समय-समय पर इसमें और पहेलियाँ जुड़ती रहेंगी।


1. साथ-साथ मैं चलती हूँ,
पर पकड़ नहीं सकते हो तुम।
अंधियारा छाते ही देखो,
गायब होती मैं गुमसुम।

-परछाईं
(रचनाकार- रानी पात्रिक)